*

*
*

Tuesday, 10 September 2019

खोये खोये

खोये खोये

कविता में से
आदमी खो गया है
और
आदमी में से
  कविता खो गई है
एक आता है
तो दूसरा जाता है
सब चल रहे हैं
पहुंचेंगे भी कहीं न कहीं
   पर मिलेंगे कैसे
कविता में से
आदमी खो गया है
   वे ढूँढते क्यों नहीं
    एक दूजे को

No comments:

Post a Comment

Blog Archive

About Me

My photo
खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन