हे प्रभो!
राजी हो क्या विराट?
बँधने इन पाशों में
मेरा तो काम ही
बस प्रार्थना भर है
क्या मेरी प्रार्थना में
तैयार हो बँधने को?
राजी हो क्या विराट?
बँधने इन पाशों में
रीत गए हैं नयन
बीत गए वे अयन
श्वास की अभ्यर्थनाएँ
प्राण में बस वर्जनाएँ
इस हृदय की वीथियों में
शेष कुछ अभिव्यंजनाएँ
आस के तन्तु बचे हैं
राजी हो क्या विराट?
बँधने इन पाशों में
शब्दों में, भावों में
श्रद्धा के दावों में
दो जुड़े हाथों में
मुँदी मुँदी आखों में
राजी हो क्या विराट?
बँधने इन पाशों में

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