मैं बैठा था
आँख वाला अंधा
घिरा सब ओर तमस था
कोई आया अचानक
नहीं वह कोई नही..
...अरे! वह तुम ही तो थे
दिया जला दिया तुमने
दिखा प्रकाश, दिखा अंधकार भी
और तब जाना
तुम भी तो यहीं हो
तुम्ही ज्ञान हो, तुम्ही प्रकाश हो
तुम्ही आत्मा हो,
तुम्ही आत्मा हो
रामनारायण सोनी

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