भाव निर्झर, रूह की राहत, प्रेम और समर्पण
मैं.... मैं अधूरा ही अच्छा हूँ और भरने को राजी हूँ इसीलिये तो शायद सुनने, पढ़ने, गुनने को खाली हूँ मन मेरा मस्त फ़कीरी में
रामनारायण सोनी
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