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Tuesday, 10 September 2019

मस्त फ़कीरी

मैं....
मैं अधूरा ही अच्छा हूँ
  और
   भरने को राजी हूँ
    इसीलिये तो शायद
     सुनने, पढ़ने, गुनने को
      खाली हूँ
   मन मेरा मस्त फ़कीरी में

    रामनारायण सोनी

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन