लुढ़कते आँसू
दरकते सवाल
हाथों की उलझती रेखाएँ,
मरी-मरी मानवी संवेदनाएँ
बेपैर घिसटती जिन्दगी
खुद में सिमटता आदमी
मिट्टी से निकले हीरे
मिट्टी से ही बेखबर
पत्थर से निकली मूरत
पत्थर से नफरत
कैसी ये उलटबासियाँ
एक विप्लव न हो जाए
एक आघात न ठहर जाए
इस दलदली जमीन में
कोई बारूद न भर जाए
इससे पहले कि संवेदनाएँ
कपूर की तरह उड़ जाए
एक बढ़ा हाथ चाहिए
एक अदद साथ चाहिए
उसे काँटा लगे तो
यहाँ चुभन चाहिए
कुछ करो न करो दोस्त
दो बूँद मरहम की
दिलों के बीच चाहिए
दम न घुटे इस जिन्दगी का
एक चुटकी साँस चाहिए
एक झप्पी, एक दुलार चाहिए
निवेदक
रामनारायण सोनी
दरकते सवाल
हाथों की उलझती रेखाएँ,
मरी-मरी मानवी संवेदनाएँ
बेपैर घिसटती जिन्दगी
खुद में सिमटता आदमी
मिट्टी से निकले हीरे
मिट्टी से ही बेखबर
पत्थर से निकली मूरत
पत्थर से नफरत
कैसी ये उलटबासियाँ
एक विप्लव न हो जाए
एक आघात न ठहर जाए
इस दलदली जमीन में
कोई बारूद न भर जाए
इससे पहले कि संवेदनाएँ
कपूर की तरह उड़ जाए
एक बढ़ा हाथ चाहिए
एक अदद साथ चाहिए
उसे काँटा लगे तो
यहाँ चुभन चाहिए
कुछ करो न करो दोस्त
दो बूँद मरहम की
दिलों के बीच चाहिए
दम न घुटे इस जिन्दगी का
एक चुटकी साँस चाहिए
एक झप्पी, एक दुलार चाहिए
निवेदक
रामनारायण सोनी

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