अगणित सरवर, तरुवर, गिरिवर
हिम-आच्छदित शैल-शिखर पर
मेघ रुचिर छूते नीलाम्बर l
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
हहर-हहर कर झरते निर्झर
कल-कल बहती सरिता अविरल
हरित-वसन धरि वसुधा सुन्दर
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
बिंदु, बिंदु से सिन्धु बनाता
कुंद-इंदु से रस सरसाता
पुष्प-पुष्प में गंध समाता
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
अग-जग, अचर-जीव सृष्टि में
रवि-शशि आतप और वृष्टि में
अविरल है क्रम सृजन-क्षरण का
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
विश्व सकल तेरा है मंदिर
कण-कण तेरा विलास है
सत्य सनातन मेरे प्रभुवर
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
रामनारायण सोनी
हहर-हहर कर झरते निर्झर
कल-कल बहती सरिता अविरल
हरित-वसन धरि वसुधा सुन्दर
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
बिंदु, बिंदु से सिन्धु बनाता
कुंद-इंदु से रस सरसाता
पुष्प-पुष्प में गंध समाता
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
अग-जग, अचर-जीव सृष्टि में
रवि-शशि आतप और वृष्टि में
अविरल है क्रम सृजन-क्षरण का
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
विश्व सकल तेरा है मंदिर
कण-कण तेरा विलास है
सत्य सनातन मेरे प्रभुवर
इन सबका तू शिल्पकार है l
तेरी महिमा अमित अपार है l l
रामनारायण सोनी

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