भाव निर्झर, रूह की राहत, प्रेम और समर्पण
हमने वो खोया है जो कभी पा ही नहीं सके तुम खो न देना उसे जो सिर्फ तुम्हारा ही है।
चाँद आसमान की दौलत है पाने की हम जिद ही करते रहे। आबाद होगा कभी घरौंदा अपना जिन्दगी भर से तिनके पिरोते रहे।।
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