इनकी सौरभ और सुन्दरता
भावों की निर्मल कोमलता
ढलती है भावों के साँचों में
उतरे भाव तेरे अन्तस में
ये गीत मेरे बस भाव मई
भावों का स्पन्दन शब्द बने
ये गीत मेरे हैं शब्द वो ही
ये भाव मेरे है बन्द वही
मेरी इनमें ही प्रीत बही
ये गीत मेरे बस भाव मई
*
*
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
About Me
- रामनारायण सोनी
- खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन
No comments:
Post a Comment