मैं उस माँ का अभिनन्दन करता हूँ
जो इक माँ की ही बेटी है
जो इक माँ की ही बेटी है
मैं उस माँ-बेटी का
वन्दन,अर्चन, अभिनन्दन करता हूँ
जिसके कारण हम तुम और सब है
वन्दन,अर्चन, अभिनन्दन करता हूँ
जिसके कारण हम तुम और सब है
मैं उस बेटी को प्रणाम करता हूँ
जिसमें मातृत्व के बीज पल रहे हैं
जिसमें मातृत्व के बीज पल रहे हैं
मैं उस बेटी का वन्दन करता हूँ
जिसमें नव संस्कृति के
आकार ढल रहे हैं
जिसमें नव संस्कृति के
आकार ढल रहे हैं

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