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Monday, 7 May 2018

प्रार्थना

प्रार्थना समर्पण है माँग नही
जहाँ माँग है वहाँ खोखला पन है
"चाहना" तो कामना का रूपान्तरण है
कामना भीतर और बाहर का द्वन्द्व है

प्रार्थना मन की मौन अभिव्यक्ति है
प्रार्थना शरीर का नहीं "मैं" का विसर्जन है
केवल शब्दों का समूह भी प्रार्थना नहीं है

शब्दों पर पवित्र भावों का आरोहण है
केवल जिह्वा का नहीं हृदय का उच्चारण है
प्रार्थना अनुनय का पर्याय नहीं है

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन