तू मेरे गीतों को, मैं तेरी आवाज लिए फिरता हूँ
बिन जुड़े बिन कहे न ये खो जाएँ अँधेरों में
न मिले संग अगर नाव और माँझी का
त्रिवेणी तो संगम है तीन नदियों का
देखते हैं गंगा जमना को तो सभी
सरस्वती को गुनिजन ही देखते हैं
आजकल मैं बहुत कन्फ्यूज्ड हूँ
हर बरस कोई मेहमान आता है
अपना नाम कुछ बताता है
बिन जुड़े बिन कहे न ये खो जाएँ अँधेरों में
न मिले संग अगर नाव और माँझी का
त्रिवेणी तो संगम है तीन नदियों का
देखते हैं गंगा जमना को तो सभी
सरस्वती को गुनिजन ही देखते हैं
आजकल मैं बहुत कन्फ्यूज्ड हूँ
हर बरस कोई मेहमान आता है
अपना नाम कुछ बताता है

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