मैं छुईमुई को छूने से डरता हूँ
कितनी सुन्दर है, सजल है
नैसर्गिक लय है इसमें
सुकुमार है
देखता हूँ उसे में निगाह भर भर
शायद देखती है वह भी मुझे
तिरछी चितवन से लजा कर
कह रही हो जैसे सहम कर
छूते ही वह सिकुड़ जाएगी
कितनी सुन्दर है, सजल है
नैसर्गिक लय है इसमें
सुकुमार है
देखता हूँ उसे में निगाह भर भर
शायद देखती है वह भी मुझे
तिरछी चितवन से लजा कर
कह रही हो जैसे सहम कर
छूते ही वह सिकुड़ जाएगी

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