किसी के लिये होऊँ या न होऊँ
मेरे लिए मैं होऊँ या कि न होऊँ
तुम्हारे होने का जिक्र होता रहे
इसके लिए मेरा होना जरूरी है
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प्रीत के सागर में
डूबता हूँ मैं अगर
किनारे पर
खड़े रहना तब तक
जब तक
साँसों के बुलबुले
सारे न निकल जाएँ
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आप मेरे अपने हैं।
मुझ पर अपनों का प्यार बहुत है
यह प्यार ऐसा ही रहने दो
यह बड़ा खूबसूरत कर्ज है
मुझे ऐसा ही कर्जदार रहने

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