आओ सब मिल कर
"सृजन" को सृजन बनाएँ हम
बारिश के इस मौसम में
सपनों का घरौंदा बनाएँ हम
कागज की नन्ही सी नाव
अपनी गलियों में दौड़ाएँ हम
काले इतराते घन को
यूँ फिट्टे मुँह चिढ़ाएँ हम
उथले से पानी में
छ्पकती छपाक परनाली में
खोया वह अल्हड़पन
थोड़ा तो ढूँढ लाएँ हम

No comments:
Post a Comment