अँगुलियों के पोर-पोर
चूम लिये सहसा
मैंने फिर फिर
जीवित इनमें हैं मधुमय
चूम लिये सहसा
मैंने फिर फिर
जीवित इनमें हैं मधुमय
वे प्रथम संस्पर्श
गहन दिग दिगन्त से
प्रेम रसधार गिरी
स्वप्निल इस झील में
व्यक्त हुए हो तुम
जल लहरियों पर
प्रेम रसधार गिरी
स्वप्निल इस झील में
व्यक्त हुए हो तुम
जल लहरियों पर
संतृप्त हुए मौन स्वर में
अम्बर की खिड़की से
स्मित अधरों की
छलका मकरंद
भीग गए शहदीले
अम्बर की खिड़की से
स्मित अधरों की
छलका मकरंद
भीग गए शहदीले
अँगुलियों के पोर-पोर
चूम लिए सहसा
मैने फिर फिर
जीवित इनमें हैं मधुमय
वे अप्रतिम संस्पर्श

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