भाव निर्झर, रूह की राहत, प्रेम और समर्पण
वास्कोडीगामा साहसी है कि हम! लेकर कागज़ की नाव न कुतमनुमा, न पतवार उतर पड़े हम असीम प्रेम सागर में
तरना किसे है! जीतेंगे डूब कर
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