हे पावन परमेश्वर मेरे!
मैं चलता हूँ
दिग्दिगन्त में
तुम तक आने के लिए
चाहे तुम मिलो, चाहे न मिलो
सर्वत्र ही पाता हूँ स्पन्दन तुम्हारा
महसूस करता हूं दिन-रात तुम्हें
इसलिए, हाँ इसीलिए.........
मैं तुम्हारे पास होऊं या नही
जानता हूँ मैं सिर्फ सफर
तुम पास हो सदा ही
सदैव तुम मेरे हो
और मैं तुम्हारा
दिग्दिगन्त में
तुम तक आने के लिए
चाहे तुम मिलो, चाहे न मिलो
सर्वत्र ही पाता हूँ स्पन्दन तुम्हारा
महसूस करता हूं दिन-रात तुम्हें
इसलिए, हाँ इसीलिए.........
मैं तुम्हारे पास होऊं या नही
जानता हूँ मैं सिर्फ सफर
तुम पास हो सदा ही
सदैव तुम मेरे हो
और मैं तुम्हारा

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