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Friday, 12 October 2018

बरखा की बूँदों जैसा

बरखा की बूंदों के जैसा
बनता मिटता मेरा मन

बरखा की बूँदो के जैसा
झर झर झरता मेरा मन
जीता सारे ही जग को
पर हारा तुम से मेरा मन

जीता सारी दुनिया को
पर हारा तुमसे मेरा मन

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन