*

*
*

Friday, 12 October 2018

अंधेरी रातें और भी हैं

अगर ये दस्तूर है
कि दीवाली की रात मे दिया जले
तो यारों!
अंधेरी रातें
कई और भी हैं

No comments:

Post a Comment

Blog Archive

About Me

My photo
खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन