अगर ये दस्तूर है
कि दीवाली की रात मे दिया जले
तो यारों!
अंधेरी रातें
कई और भी हैं
*
*
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- रामनारायण सोनी
- खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन
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