अभी अभी
आवाज सुनी है
नूपुर की तुमने जो
मन ने मेरे बाँध रखे हैं
आवाज सुनी है
नूपुर की तुमने जो
मन ने मेरे बाँध रखे हैं
छुअन मेरी
समझी जो तुमने
रूहों की अदला बदली है
समझी जो तुमने
रूहों की अदला बदली है
हाथों से जो
छलक उठी है
प्रीत हमारी बह निकली है
छलक उठी है
प्रीत हमारी बह निकली है

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