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Tuesday, 16 October 2018

साहस मेरा

जानता हूँ
मेरी चोंच में भरे पानी से
आग तो बुझेगी नही
पर मैं रुकूँगा नही

मानता हूँ
उछाला पत्थर मैने
नही भेद सकेगा कभी
इस गर्वीले आसमान को
पर मैं रुकूँगा नही

समझता हूँ
जलता हुआ अदना दिया हूँ
आँधियाँ हर दिशा से चल रही
पर मैं बुझूँगा नही

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन