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Friday, 1 January 2021

नैना गुँथ गये

नैना गुँथ गये

कौन मैं और कौन तुम हो
दो पखेरू डाल पर ऐसे मिले
नैना गुँथ गये।।

लिपट लिपट तमाल से
वल्लरी का रोम हर्षण
चन्द्रिका पहने कलाएँ
सज रही सारी दिशाएँ।

दो हृदय गल हार हो ऐसे मिले
नैना गुँथ गए।।

ओढ़ नीलम तारकों को
सिक्त मन रजनी हुई है
बादलों की ओट ही से
चुलबुले चंचल नयन से

दो प्रणय के पुष्प ये ऐसे खिले
नैना गुँथ गए।।

रामनारायण सोनी
३०/०१/२०

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