नैना गुँथ गये
कौन मैं और कौन तुम हो
दो पखेरू डाल पर ऐसे मिले
नैना गुँथ गये।।
लिपट लिपट तमाल से
वल्लरी का रोम हर्षण
चन्द्रिका पहने कलाएँ
सज रही सारी दिशाएँ।
दो हृदय गल हार हो ऐसे मिले
नैना गुँथ गए।।
ओढ़ नीलम तारकों को
सिक्त मन रजनी हुई है
बादलों की ओट ही से
चुलबुले चंचल नयन से
दो प्रणय के पुष्प ये ऐसे खिले
नैना गुँथ गए।।
रामनारायण सोनी
३०/०१/२०

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