अभी अधर अंगार भरे हैं
रुधिर सभी के खार भरे हैं
चन्दन वन के सुरभित तन में
दावानल के त्रास धरे हैं।
दूर क्षितिज में प्राची ले कर
रश्मिपुञ्ज की थाती दे कर
नवल प्रात में नई सुबह ले
लौटेगा रवि फिर धरती पर।।
धरो तुम धीरज का आयास
सखे! फिर लौटेगा मधुमास।।
पवन और पावन पानी में
मही की इस रजधानी में
नगर भर घूम रहा विषधर
घुला है विष ही विष घर घर।
मिलेगा सागर से मधुग्रास
संजीवन है हिमाद्री के पास
यहीं फिर लौटेगा आरोग्य
मिलेगा स्वच्छ सभी को भोग्य।।
नियति का करना मत उपहास
सखे! फिर लौटेगा मधुमास।।
नहीं कोई अपना अपने पास
मिली न अपनों की भी लाश
नजर भर देख सके न हम
विदा होते वे अपने खास।
बहुत खोया है हम सब ने
बहुत सी आशा और सपने
दुःखों दर्दों में जो पिसते
थाम लें बाकी सब रिश्ते।।
शीघ्र ही बीतेगा संत्रास
सखे! फिर लौटेगा मधुमास।।
रुदन यह कैसा कण कण में
चले हम आये किस रण में
बचे न प्रहरी जन जन के
चुके है कोष सभी धन के।
हमारे मन ना छोटे हों
बुला लो जो ना लौटे हों
भोर के तारे उगने दो
ना टूटे माला के मनके।।
ना छोड़ो आस, करो विश्वास
सखे! फिर लौटेगा मधुमास।।
रामनारायण सोनी
०७.०१.२१
https://youtu.be/b8zXbmGtAho

No comments:
Post a Comment