नहीं जानता
इतिहास और उत्पत्ति,
प्रजातियाँ और प्रकल्प
इन फरफराती चिड़ियों का
मुझे बस पसन्द हैं
पंख इनके
नापती है आकाश जिससे
खेलती है हवाओं से
फराफरा कर आ बैठती है
आँगन के चौंतरे पर
टेढ़ी गर्दन कर देखती है
जब एक आँख से
और मैं लालित्य से भर जाता हूँ
छोड़ जाती है कानों में
फड़फड़ाते पंखों का
सरसराता संगीत जिसे
सूने में भी अकसर सुनता रहता हूँ
रामनारायण सोनी
१७.०८.२०

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