मैं अभी व्यस्त हूँ
तुमको, उसको,
किसी और को खोजने में
इस भय से कि
कहीं मुझे मैं न मिल जाऊँ
यहाँ प्रश्न अनेक मुझ में
धधक रहे है
रामनारायण सोनी
25.01.20
क्या तुम्हारी
मेरी,
हमारी प्रार्थनाएँ
अब कोई नहीं सुनता ?
देखो!
इन उजालदानों से
अँधेरे ही क्यों झाँकते हैं
रामनारायण सोनी
25.01.20
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