*

*
*

Friday, 1 January 2021

कोरोना से डरो ना

सिक्के के दो पहलू

एक पहलू
अभी जीवन कहीं दुबक गया है
करोना दानव कालमेघ बन
धरती पर उतर गया है,
क्या यह डर है कि..
सागर अपने तटों को लाँघ कर
बस्तियाँ न उजाड़ दे,
अमावस की काली रात में
तारे हम पर न आ गिरें,
बिजली तारों को छोड़
सड़क पर न बहने लगे,
कहीं से नदियाँ मुड़ कर न आ जाए
बहा ले जाएँ घर को अपने
क्या यह डर है कि..
कोरोना वायरस धरती को
जीव रहित न कर दे?
रुको! यह खाली पीली
डर का कल्पित डर है
बस, रहना केवल अपने घर है

दूसरा पहलू
आज शहर से गाँव सुखी हैं
लोग इसीलिये घर को दौड़े हैं
जहाँ दिलों की सिकुड़ी बस्ती
पाँव पड़े अनगिन फोड़े हैं

बन्द पड़ी है गेंगवार, रेप, लूट
अपराधों की भारी गचपच
टी. वी. पर से नेता गायब
थोथे वादों की ना भचभच

कोयल कूक रही आँगन में
पादप पल्लव स्वच्छ धरे हैं
संध्या से अरुणिम ऊषा तक
तारे टिम टिम प्रखर भरे हैं।

गंगा जमना के मिस फूँके अरबों
पर ऐसी निर्मल कब थी माँ गंगे
प्रकृति ने बोला यह मंत्र स्वयं ही
"नमामि यमुने" और "नमामि गंगे"

रामनारायण सोनी
25.05.20

No comments:

Post a Comment

Blog Archive

About Me

My photo
खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन