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Thursday, 4 March 2021

कोई तो भगीरथ है

कोई तो भगीरथ है
  जो उतार लाया 
   गंगा को स्वर्ग से
न तो मैं गंगा हूँ
  न ही भगीरथ
कौन है वो
  जो कर गया यह सब
   बस एक अहसास है मुझे
   बस एक अबोध सा बोध है
पर जो कुछ भी है
 कितना  सुन्दर है
  कृपा का वर्षण है
  तुम-हम बस भींगते रहें

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन