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Thursday, 4 March 2021

थामे रहना

छोड़ना मत अब हाथ मेरा
क्योंकि...यकीनन
मैने छोड़ दिया है पूछना अब
दुनिया से भी, 
खुद से भी
..कि हम कहाँ जा रहे हैं?

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन